कला में श्रम की गरिमा : श्रमिक दिवस पर एक विशेष चिंतन

Authors
  • कुशाग्र जैन

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1 मई, अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस, एक दिन है जब हम श्रमिकों के अधिकारों, सम्मान और उनके योगदान को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि समाज की नींव केवल विचारों से नहीं, बल्कि कठिन श्रम से बनती है। श्रम का सम्मान सिर्फ मजदूरों तक सीमित नहीं, बल्कि कला के माध्यम से भी प्रदर्शित किया जाता है। कला, चाहे वह चित्रकला, संगीत, नृत्य, या साहित्य हो, हर रूप में श्रम की महिमा और उसकी कड़ी मेहनत को दर्शाती है। चित्रकार, कवि, मूर्तिकार और अन्य कलाकारों का श्रम भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना खेतों में काम करने वाले श्रमिक का। इस दिन हम न केवल श्रमिकों के अधिकारों की बात करते हैं, बल्कि रचनात्मक श्रम का भी सम्मान करते हैं। प्रमुख कलाकृतियाँ जैसे "The Gleaners" और "Stone Breakers" श्रमिकों की मेहनत और संघर्ष को चित्रित करती हैं, जो समाज में श्रम के महत्व को बढ़ावा देती हैं।

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Published
2025-05-31
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Articles
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Copyright (c) 2025 कुशाग्र जैन (Author)

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How to Cite

कला में श्रम की गरिमा : श्रमिक दिवस पर एक विशेष चिंतन. (2025). KALAA SAMIKSHA, 1(02), 2-3. https://kalaasamiksha.in/index.php/ks/article/view/7

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