कला के चार आयाम
- Authors
-
-
कुशाग्र जैन
Author
-
- Abstract
-
लेख 'कला के चार आयाम' में कला के विभिन्न अनुभव और मूल्यांकन के चार मुख्य दृष्टिकोणों पर चर्चा की गई है, जो कला के बहुआयामी स्वरूप को समझने में सहायक हैं। पहला आयाम सौंदर्यात्मक है, जो कला के रूप, रंग और सौंदर्य से संबंधित होता है, जैसे लियोनार्डो दा विंची की 'मोना लिसा' में। दूसरा आयाम सामाजिक और सांस्कृतिक है, जो कला के माध्यम से समाज के मुद्दों और परंपराओं को उजागर करता है, जैसे पिकासो की 'गुएर्निका'। तीसरा आयाम बौद्धिक है, जो कला में छिपे विचारों और संदेशों को दर्शाता है, जैसे मार्क रोथको की 'कलरफील्ड पेंटिंग्स'। चौथा आयाम भावनात्मक है, जो कला द्वारा व्यक्त की गई भावनाओं के माध्यम से दर्शकों में व्यक्तिगत प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है, जैसे एडवर्ड मुंच की 'द स्क्रीम'। इन चार आयामों से कला का गहरा और व्यापक अनुभव संभव हो पाता है।
- References
- Downloads
- Published
- 2025-04-30
- Section
- Articles
- License
-
Copyright (c) 2025 कुशाग्र जैन (Author)

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial 4.0 International License.
How to Cite
Most read articles by the same author(s)
- कुशाग्र जैन, कला समीक्षा पटल की आवश्यकता , KALAA SAMIKSHA: Vol. 1 No. 01 (2025): KALAA SAMIKSHA (PRE ISSN)
- कुशाग्र जैन, कला लेखन में अवसर , KALAA SAMIKSHA: Vol. 1 No. 01 (2025): KALAA SAMIKSHA (PRE ISSN)
- कुशाग्र जैन, कला में श्रम की गरिमा : श्रमिक दिवस पर एक विशेष चिंतन , KALAA SAMIKSHA: Vol. 1 No. 02 (2025): KALAA SAMIKSHA (PRE ISSN)
- कुशाग्र जैन, लियोनार्डो दा विंची: पुनर्जागरण युग का सार्वभौमिक प्रतिभा , KALAA SAMIKSHA: Vol. 1 No. 02 (2025): KALAA SAMIKSHA (PRE ISSN)
- कुशाग्र जैन, भारतीय पत्रिकाओं में कला समीक्षा की भूमिका , KALAA SAMIKSHA: Vol. 1 No. 03 (2025): KALAA SAMIKSHA (PRE ISSN)
