महाराष्ट्र की समृध्द आभूषण संस्कृति

Authors
  • सुप्रिया जोशी

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Abstract

यह शोध पत्र 'महाराष्ट्र की समृद्ध आभूषण संस्कृति' पर केंद्रित है, जो भारतीय आभूषण कला और परंपरा को प्रकट करता है। महाराष्ट्र की आभूषण संस्कृति प्राचीन 'सोलह श्रृंगार' की परंपरा से जुड़ी है, जिसमें स्त्री और पुरुष दोनों के लिए आभूषण महत्वपूर्ण रहे हैं। महाराष्ट्र में सोने, चांदी और मोती के आभूषणों का अत्यधिक महत्व है, और ये विभिन्न अंगों के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए हैं। जैसे, बालों के लिए अंबाडा फुल और जुडा पीन, कान के लिए लवंग और बुगडी, नाक के लिए नथ, गले के लिए ठुशी और कोल्हापुरी साज, और हाथों के लिए पाटल्या और गहु तोडे। पैरों के लिए चांदी की जोडवी/बिछिया विशेष रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा पहनी जाती है। इन आभूषणों का महत्व केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि ये अक्युप्रेशर और एक्युपंक्चर की तरह काम करते हैं, जो पाचन, रक्त संचार और हार्मोन्स के संतुलन में सहायक होते हैं। सोने और चांदी को शरीर के तापमान को संतुलित रखने के लिए विशिष्ट अंगों पर पहना जाता है, और यह परंपरा महाराष्ट्र की समृद्ध विरासत का हिस्सा है।

   
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Published
2025-04-30
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Articles
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Copyright (c) 2025 सुप्रिया जोशी (Author)

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How to Cite

महाराष्ट्र की समृध्द आभूषण संस्कृति. (2025). KALAA SAMIKSHA, 1(01), 18-24. https://kalaasamiksha.in/index.php/ks/article/view/6