उत्तर प्रदेश एवं बिहार के लोक पर्वों में कलागत अभिप्राय
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दीक्षा सिंह
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- Abstract
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भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वाधिक प्राचीनतम् एवं समृद्ध संस्कृति है। यहां की समृद्ध संस्कृति में सांस्कृतिक विविधता का प्रमुख योगदान है। उत्तर भारत के प्रमुख राज्य बिहार तथा उत्तरप्रदेश परंपराओं, आस्थाओं, मान्यताओं, और विचारों जैसे सांस्कृतिक मूल्यों एवं विरासत को आगे बढ़ाने में प्रमुख स्थान रखते हैं। यहाँ की कला ने आधुनिकता के अन्य सांस्कृतिक गुणों को अपने में समाहित किया, साथ ही अपने अस्तित्व के मूल दामन को भी कभी नहीं छोड़ा। भारतीय लोककलाएं संपूर्ण समाज की धार्मिक भावनाओं का चित्रित इतिहास है, जो मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में जानी जाती हैं। कला सदैव ही भारतीय संस्कृति एवं परंपरा की सहचारी रही हैं। कला के माध्यम से ही संस्कृति को अभिव्यक्ति मिलती है।
उत्तर प्रदेश एवं बिहार की धरती प्राचीन काल से ही कला, चित्रकला तथा सांस्कृतिक विरासत को शीर्ष बिंदु तक पहुंचाने के लिए प्रसिद्ध रही है। यहां की लोक कलाएं भारत ही नहीं अपितु संपूर्ण विश्व के समक्ष एक आदर्श दर्पण हैं, जिसको अन्य कलाएं भी आदर्श मानकर अनुसरण करती हैं। उत्तर प्रदेश की चौक पूरना, सांझी कला तथा बिहार की मधुबनी, मंजूषा एवं टिकुली कला आज वर्तमान में भी भारतीय परंपरा एवं संस्कृति को जीवित रखे हुए हैं। इन क्षेत्रों में प्रचलित लोक पर्वों में रामनवमी, होली, रक्षाबंधन, दशहरा, दीपावली, नाग पंचमी, छठ पूजा, मकर संक्रांति, गोवर्धनपूजा आदि सम्मिलित है, जिसमें घर की महिलाएं प्रमुखता से संपूर्ण आस्था के साथ घर की साज-सज्जा के लिए उत्कृष्ट कलाकृतियों का निर्माण करती हैं, यह कृतियां उनके अंतर्मन की अभिव्यक्ति हैं, जो समाज का प्रतिबिंब है। यही सजावट वहां की लोक कला के नाम से जानी जाती हैं। लोक कलाएं प्रमुख रूप से ग्रामीण अंचलों से अधिक संबंधित है, यहाँ इन कलाओं के मूल सौंदर्यात्मक प्राण को देखा जा सकता है। जिसका इतना प्रभावशाली दर्शन शहरी जीवन में अपवाद मात्र है। लोक कला में पर्व तथा शादी-विवाह में कुछ कलात्मक तत्वों जैसे प्रतीक, अलंकरणों, ज्यामिति अभिप्राय एवं मानवाकृतियों का अंकन किया जाता है, इसका अपना एक विशिष्ट धार्मिक महत्व है। यह कलाएं पीढ़ी दर पीढ़ी वहां की संस्कृति एवं परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ-साथ संस्कृति को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन कलाओं के माध्यम से उस स्थान की संस्कृति एवं सभ्यता के विविध आयाम परिलक्षित होते हैं।
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- Published
- 2025-11-30
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