डिजिटल युग में भारतीय कला - सतीश गुजराल की कला में आधुनिकता की छवियाँ
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इंदु
Author
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- Abstract
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21वीं सदी ने कला और प्रौद्योगिकी के बीच एक अभूतपूर्व संगम को जन्म दिया है, जिसने रचनात्मक अभिव्यक्ति की प्रक्रियाओं को वैश्विक स्तर पर गहराई से प्रभावित किया है। भारत, जो अपनी समृद्ध दृ श्यात्मक विरासत के लिए प्रसिद्ध है, इस डिजिटल परिवर्तन के प्रभाव से समकालीन कला-प्रथाओं में एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। यह शोधपत्र भारतीय कला और प्रौद्योगिकी नवाचार के अंतर्संबंधों की पड़ताल करता है, विशेष रूप से बहुविध कलाकार सतीश गुजराल के योगदान को केंद्र में रखते हुए। चित्रकला, मूर्तिकला, स्थापत्य और मिश्रित माध्यमों में उनके प्रयोगधर्मी कार्यों को समकालीन डिजिटल और न्यू मीडिया आर्ट की पूर्वपीठिका के रूप में प्रस्तुत किया गया है। औद्योगिक सामग्रियों, स्थानिक प्रयोग और दर्शक सहभागिता को अपनाकर गुजराल ने जिन सौंदर्यशास्त्रीय रणनीतियों को विकसित किया, वे आज की वर्चुअल रियलिटी, ऑगमेंटेड रियलिटी और आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस आधारित कलाओं के केंद्र में हैं। साथ ही, यह शोध डिजिटल संरक्षण की बदलती अवधारणाओं का विश्लेषण करता है, जैसे 3डी आर्काइविंग और वर्चुअल संग्रहालय, जो सांस्कृतिक धरोहर तक पहुँच को पुनर्परिभाषित कर रही हैं। अंततः, यह अध्ययन गुजराल की कलात्मक विरासत को परंपरा और नवाचार के उस विस्तृत मार्ग में स्थापित करता है, जो भारतीय दृश्य संस्कृति को डिजिटल युग में नई दिशा दे रहा है।
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- Published
- 2025-10-31
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- Articles
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