कालिदास के काव्यों में भारतीय मिथकों का समीक्षणात्मक अध्ययन

Authors
  • गणेश रेड्डी

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Abstract

यह शोधपत्र महाकवि कालिदास के काव्यों में निहित भारतीय मिथकों (पौराणिक कथाओं) का समीक्षणात्मक अध्ययन करता है। कवि को क्रांतदर्शी कहा गया है, जो अपनी कल्पना और प्रतिभा से अलौकिक सृष्टि की रचना करता है। भारतीय मिथक, जो धार्मिक, दार्शनिक और नैतिक विश्वासों का विशाल संग्रह है, ब्रह्मांड, मानवीय मूल्यों और जीवन के रहस्यों को परिभाषित करता है।

प्रस्तुत शोध में कालिदास की सात प्रमुख कृतियों—कुमारसंभव, रघुवंश, मेघदूत (खंड/लघु काव्य), ऋतुसंहार (लघु काव्य), और मालविकाग्निमित्र, विक्रमोर्वशीय, अभिज्ञान शाकुन्तल (दृश्य काव्य) में प्रयुक्त मिथकीय तत्वों का विश्लेषण किया गया है। मिथक की संकल्पना का अध्ययन करते हुए, शोध में पौराणिक कथाओं में निबद्ध अलौकिक तत्वों (जैसे देवताओं, यक्षों, अप्सराओं, श्राप, वरदान) और रूपकात्मक अलंकरणों के माध्यम से व्यक्त नैतिक, वैश्विक और सांस्कृतिक मूल्यों का अन्वेषण किया गया है।

कालिदास ने वेदों, रामायण, महाभारत और पुराणों से प्राप्त इन मिथकों को अपनी रचनात्मकता से नया आयाम दिया। उदाहरण के लिए, रघुवंश में सुरभिधेनु का श्राप, विक्रमोर्वशीय में पुरुरवा-उर्वशी का अलौकिक प्रेम, और अभिज्ञान शाकुन्तल में शाप के कारण स्मृति का विलोप। यह शोध निष्कर्ष निकालता है कि कालिदास के काव्य मानवीय विचारों को मिथकों की साहित्यिक भाषा में अभिव्यक्त कर भारतीय कला और साहित्य को गहराई से विकसित करते हैं।

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Published
2025-09-30
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कालिदास के काव्यों में भारतीय मिथकों का समीक्षणात्मक अध्ययन. (2025). KALAA SAMIKSHA, 1(06), 230-239. https://kalaasamiksha.in/index.php/ks/article/view/50