भारतीय लोक कला के माध्यम से महिलाओं में सामाजिक आर्थिक सशक्तिकरण
- Authors
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अर्चना सिंह
Author
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- Abstract
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भारतीय लोककला महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम है। मधुबनी, वारली, फड़, बुनाई, कढ़ाई और मिट्टी शिल्प जैसी कलाओं ने महिलाओं को आजीविका के अवसर प्रदान किए हैं। इन कलाओं के बाज़ारीकरण से महिलाएँ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनीं और उनके आत्मसम्मान व सामाजिक भागीदारी में वृद्धि हुई। लोककला न केवल परंपरा और संस्कृति को संरक्षित करती है, बल्कि महिलाओं को पहचान और सम्मान भी दिलाती है। इस प्रकार लोककला महिलाओं को आश्रितता से मुक्त कर आत्मनिर्भरता और समानता की ओर अग्रसर करती है, जो सामाजिक परिवर्तन और प्रगति का आधार माना जाता है।
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- Published
- 2025-09-30
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Copyright (c) 2025 अर्चना सिंह (Author)

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How to Cite
भारतीय लोक कला के माध्यम से महिलाओं में सामाजिक आर्थिक सशक्तिकरण. (2025). KALAA SAMIKSHA, 1(06), 202-206. https://kalaasamiksha.in/index.php/ks/article/view/47
