शक्ति, भक्ति और रक्षण के प्रतीक: हनुमान व भैरव जी की शिल्प परंपरा और स्थापत्य में उपस्थिति

Authors
  • अलपेन्द्र झाला

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Abstract

यह लेख 'शक्ति, भक्ति और रक्षण के प्रतीक: हनुमान व भैरव जी की शिल्प परंपरा और स्थापत्य में उपस्थिति' पर आधारित है, जो हनुमान और भैरव जी के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। हनुमान जी की मूर्तियाँ वीरता, भक्ति और बल का प्रतीक हैं, जिसमें गदा उनका प्रमुख आयुध है। उन्हें दक्षिण दिशा के रक्षक के रूप में मंदिरों के प्रवेश द्वार पर स्थापित किया जाता है। वहीं, भैरव जी भगवान शिव के उग्र रूप हैं, जो काल और मृत्यु के अधिपति माने जाते हैं। भैरव जी की मूर्तियाँ उग्र, विकराल और तांत्रिक चिन्हों से युक्त होती हैं, और उन्हें मंदिर परिसर के सीमांत क्षेत्रों में रक्षक देव के रूप में स्थापित किया जाता है। हनुमान और भैरव दोनों ही भारतीय धार्मिक चेतना के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं, जो शिल्प और स्थापत्य कला के माध्यम से शक्ति, भक्ति और रक्षण का संदेश देते हैं।

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Published
2025-04-30
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शक्ति, भक्ति और रक्षण के प्रतीक: हनुमान व भैरव जी की शिल्प परंपरा और स्थापत्य में उपस्थिति. (2025). KALAA SAMIKSHA, 1(01), 11-14. https://kalaasamiksha.in/index.php/ks/article/view/4