थारू जनजातीय लोक कला एवं भारतीय संस्कृति और विरासत की पहचान
- Authors
-
-
जयवीर सिंह
Author
-
- Abstract
-
हमारे देश में सैकड़ों जनजातियां निवास करती हैं। देश के विभिन्न अंचलों में जनजातियों का अस्तित्व है । भारत की जनजातीयां अधिकांशता वनों में या पर्वतों पर निवास करती हैं। इन सब की जीवन शैली और संस्कृति भारतीय परंपरा के अनेक स्रोतों का परिचय हमें करती है। ऐसे ही एक जनजाति है थारू जनजाति जो कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और नेपाल देश में निवास करती है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी, बहराइच, गोंडा और बलरामपुर जिले के तराई क्षेत्रों में थारूओं की आबादी पाई जाती है। थारू जनजाति का निवास अधिकांशत घनें जंगलों में पाया जाता है। थारू जनजाति की कला अपने आप में विस्तृत रूप में व्यापक है और अपनी कला विरासत को संरक्षित की हुई है। लोक कला लोक साहित्य में लोकगीतों का जो स्थान होता है वही स्थान लोक कला में लोक चित्रों का होता है। लोकगीतों में शब्द की प्रधानता होती है तो लोक चित्रों में रेखा-रंग की डॉ. प्रफुल्ल कुमार सिंह ने लोग चित्रों को आंकिक लोकाभिव्यक्ति कहा है तथा भित्तिचित्र, रंगोली, अल्पना, चौक, मेहंदी, गोदना अनुष्ठानिक के आकृतियां आदि को इसके अंतर्गत स्वीकार किया है।
- References
- Published
- 2025-08-31
- Section
- Articles
- License
-
Copyright (c) 2025 जयवीर सिंह (Author)

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial 4.0 International License.
