भारतीय कला के वैश्वीकरण में मूर्तिकार राम वंजी सुतार का योगदान
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अनुज मिश्रा
Author
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भारतीय मूर्तिकला का इतिहास अति प्राचीन रहा हैं जिसमें भिन्न-भिन्न काल खण्डों ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक चेतनाओं को मूर्त रूप प्रदान किया है। जो भारत के इतिहास के लिए गौरवशाली रही है, आधुनिक काल में मूर्तिकला को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने वाले मूर्तिकारों में पद्मभूषण से अलंकृत राम वंजी सुतार का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। सुतार जी का जीवन और उनके मुर्तिशिल्प भारतीय सांस्कृतिक, राष्ट्रवादी और कलात्मकता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
राम वंजी सुतार ने महात्मा गांधी, डॉ० भीमराव अम्बेडकर सरदार,वल्लभ भाई पटेल, सुभाष चंद्र बोस, पण्डित जवाहर लाल नेहरू आदि महापुरुषों की प्रतिमाओं को भारत में ही नहीं अपितु पश्चिमी देशों में स्थापित कर भारतीय संस्कृति का दर्शन और लोकतांत्रिक मूल्यों का परचम लहराया है। उनके द्वारा सृजित कृति “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी जो कि विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमाओं में से एक है, जो केवल हमारे भारत में ही नहीं अपितु पश्चिमी देशों में भी आकर्षण का केन्द्र है।
सुतार जी यर्थाथवादी शैली के लिए प्रसिद्ध है, इन्होंने अवाक्ष और आदम कद प्रतिमाओं का भव्य निर्माण किया है। जिसमें रस, भाव, प्रमाण, गहराई व संतुलन की सजीवता व अभिव्यक्तियां पूर्ण रूप से झलकती है। और भारतीय संस्कृति को प्रभावित करने का माध्यम है। सुतार जी की मूर्ति कला में तकनीकी कार्य तकनीकी माध्यम, और सामाजिक उन्नयन में अहम योगदान रहा है।
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- Published
- 2025-08-31
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