हरिवंश पुराण कथा चित्रों का निरूपण: मेवाड़ का कलात्मक और दार्शनिक आयाम
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रंजना जांगिड़
Author
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- Abstract
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मेवाड़ शैली, भारतीय लघुचित्रकला की एक प्रमुख राजस्थानी शैली है, जो अपने धार्मिक विषयों, जीवंत रंगों और स्पष्ट रेखांकन के लिए जानी जाती है। यह शैली केवल कलात्मक अभिव्यक्ति ही नहीं, बल्कि भक्ति, संस्कृति और तत्कालीन सामाजिक मूल्यों का भी दर्पण है। विषय वस्तु में प्रमुखता से हरिवंश पुराण, श्रीमद्भागवत, रामायण और महाभारत जैसी पौराणिक कथाओं पर आधारित होती है, जिसमें भक्ति संतों की लीलाओं और रागमाला चित्रण भी शामिल है। रेखांकन में मोटी, स्पष्ट और मजबूत रेखाओं का प्रयोग किया जाता है, जो आकृतियों को ठोस रूप देती हैं। इनमें लयात्मकता और प्रवाह स्पष्ट दिखाई देता है। प्राकृतिक और चटकीले रंगों जैसे लाल, पीला, हरा, नीला और सफेद का बहुतायत से उपयोग होता है। रंगों का भराव सपाट होता है, जिसमें कोई छायांकन नहीं होता, लेकिन रंग अपनी प्रतीकात्मकता और सौंदर्यबोध के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
मानव आकृतियों में बड़ी, उभरी हुई आँखें और अक्सर आड़े कोण में चेहरा चित्रित होता है। पशु और वनस्पति भी शैलीबद्ध और प्रतीकात्मक रूप में दर्शाए जाते हैं। चित्र में सक्रिय और निष्क्रिय अंतराल का कुशलता से उपयोग किया जाता है। दृश्यों को अक्सर दो भागों में बाँटा जाता है, जो कथात्मकता के प्रवाह और दृश्य के अलगाव में सहायक होता है।
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- Published
- 2025-06-30
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- Articles
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